विभाग अवलोकन
खेल मनोविज्ञान विभाग की शुरुआत 1983 में एनएसएनआईएस पटियाला के खेल विज्ञान संकाय के एक भाग के रूप में की गई थी। खेल मनोविज्ञान इस बात पर ध्यान देता है कि शारीरिक गतिविधि और मानसिक स्वास्थ्य कैसे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। खेल मनोवैज्ञानिक मानसिक फिटनेस को प्राथमिकता देकर एथलीटों को उच्च स्तर का प्रदर्शन बनाए रखने में मदद करते हैं। वे टीमवर्क और भावनात्मक विनियमन जैसे कौशल के संबंध में खेल भागीदारी पर भी ध्यान देते हैं। हाल ही में विभाग ने पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के सहयोग से खेल मनोविज्ञान में एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किया है।
मुख्य सकेंद्रित/फोकस
शैक्षणिक गतिविधियाँ
विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2023-24 से पंजाबी विश्वविद्यालय के सहयोग से खेल मनोविज्ञान में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा शुरू किया है।
विभाग निम्नलिखित पाठ्यक्रमों के शिक्षण कार्य में भी सक्रिय है:
- एम.एससी. (खेल प्रशिक्षण/कोचिंग)
- डिप्लोमा (खेल प्रशिक्षण/कोचिंग)
- विभिन्न प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम
- विभिन्न कौशल विकास पाठ्यक्रम
- विभिन्न पुनश्चर्या/रिफ्रेशर पाठ्यक्रम
- विभिन्न खेल विज्ञान डिप्लोमा पाठ्यक्रम
- अन्य लघु पाठ्यक्रम
इंटर्नशिप कार्यक्रम
- विभाग एम.एससी. खेल मनोविज्ञान के छात्रों को 3 महीने से लेकर 1 वर्ष तक की अवधि की इंटर्नशिप प्रदान करता है।
परीक्षण मानदंड
मनोवैज्ञानिक परीक्षण, परामर्श और अनुवर्ती कार्य
विभिन्न टॉप्स योजना, एनसीओई विषयों, राष्ट्रीय शिविरों और एसटीसी के प्रतिभागियों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन प्रयोगशाला और मैदानों में खेलो इंडिया के प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है। खिलाड़ियों/एथलीटों व प्रशिक्षकों/कोचों के साथ डेटा विश्लेषण और रिपोर्ट बनाने पर चर्चा की जाती है। परीक्षण के परिणामों और खिलाड़ियों/एथलीटों की आवश्यकता के अनुसार परामर्श सत्र और विभिन्न हस्तक्षेप किए जाते हैं। परामर्श सत्र में प्रतिस्पर्धी चिंता, मानसिक दृढ़ता, बायोफीडबैक तंत्र, प्रतिक्रिया समय, सेंसोमोटर समन्वय, धारणा और ध्यान कार्य, समय-आंदोलन प्रत्याशा जैसी कई तरह की जांच की जाती है।
अनुपालन और प्रगति की निगरानी के लिए अनुवर्ती कार्रवाई बहुत महत्वपूर्ण है। अनुवर्ती कार्रवाई के दौरान निगरानी सामान्य चर्चा और क्षेत्र अवलोकन के माध्यम से की जाती है।
विभिन्न टॉप्स (TOPS) योजनाओं, एनसीओई (NCOE) खेल विधाओं, राष्ट्रीय शिविरों और एसटीसी (STC) खिलाड़ियों/एथलीटों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन ‘खेलो इंडिया’ के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार प्रयोगशाला और मैदानी स्तर पर किया जाता है। आंकड़ों का विश्लेषण एवं रिपोर्ट निर्माण खिलाड़ियों/एथलीटों और प्रशिक्षकों/कोचों के साथ साझा किया जाता है। परीक्षण परिणामों और खिलाड़ियों/एथलीटों की आवश्यकताओं के अनुसार परामर्श सत्र और विभिन्न हस्तक्षेप (interventions) किए जाते हैं।
परामर्श सत्रों के अंतर्गत प्रतिस्पर्धात्मक तनाव, मानसिक दृढ़ता, बायोफीडबैक विधियाँ, प्रतिक्रिया समय, सेंसोमोटर समन्वय, ग्रहणशीलता और ध्यान क्रियाओं तथा समय-गतिविधि अनुमान जैसी अनेक मानसिक अवस्थाओं की जांच की जाती है।
अनुवर्ती प्रक्रिया (follow-up) अनुपालन सुनिश्चित करने और प्रगति की निगरानी के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। इस दौरान निगरानी सामान्य चर्चा और मैदानी अवलोकन के माध्यम से की जाती है।
उपकरण
| क्र.सं. | उपकरण |
|---|---|
| 1 | 8 चैनल कम्प्यूटरीकृत बायोफीडबैक |
| 2 | वियना टेस्ट सिस्टम (वीटीएस) |
| 3 | पहनने योग्य बायोफीडबैक डिवाइस |
| 4 | विजन ट्रेनिंग सिस्टम (एसवीटी) |
| 5 | ध्यान प्रशिक्षण प्रणाली (न्यूरोट्रैकर) |
| 6 | झुकने वाली कुर्सी |
| 7 | कॉग्निटिव ट्रेनिंग सॉफ्टवेयर (रिया कॉम) |
| 8 | ह्यूमैक न्यूरो बैलेंस |
| 9 | 12 बिस्तरों वाला विश्राम क्षेत्र |
अनुसंधान/रिसर्च
- राष्ट्रीय प्रकाशन: 13
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन: 08
- विभाग एम.एससी. (खेल प्रशिक्षण/कोचिंग) के छात्रों को शोध प्रबंध कार्य के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।
स्टाफ सदस्य
डॉ. दीपक मिश्रा
वैज्ञानिक अधिकारी (मनोविज्ञान)
सुश्री मीनल गुप्ता
उच्च प्रदर्शन विश्लेषक (मनोविज्ञान)
श्री शिवम
प्रदर्शन विश्लेषक (मनोविज्ञान)
संपर्क:- 84334-78285
